प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S336, इसमें बताया गया है कि ईश्वर भक्ति कैसे करें ? इसके कितने भेद हैं? भेद सहित जाने। ईश्वर भक्ति क्या है? ईश्वर भक्ति करने के क्या फायदे हैं? ईश्वर भक्ति किस तरह किया जाता है? ईश्वर भक्ति में पहले क्या करना चाहिए? ईश्वर की भक्ति कितने तरह से कर सकते हैं? इस विषय का प्रवचन।
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| प्रवचन चित्र |
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| प्रवचन चित्र दो |
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| प्रवचन समाप्त |
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि ईश्वर भक्ति कैसे करते हैं? इसके कितने भेद हैं । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।
S336, ईश्वर भक्ति कैसे करें हैं? इसके कितने भेद हैं? भेद सहित जाने -महर्षि मेंहीं
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