7. सन्तों के विचार में स्वप्न क्या है?
धर्मानुरागिनी प्यारी जनता !
7. "मोह की नींद में अनेक प्रकार का स्वप्न हो रहा है। जाग्रत अवस्था में जो हम कर रहे हैं, सन्तों के विचार में स्वप्न अवस्था में कर रहे हैं। योगी परमार्थी होते हैं। परम तत्त्व के ज्ञाता होते हैं। जो ब्रह्म का ज्ञान रखते हैं, वे परमार्थी होते हैं। इस परमार्थ तत्त्व को जो ग्रहण करता है, वह जगता है। संसार का ज्ञान जब है, तब सोया हुआ है।"
प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंसी महाराज का यह प्रवचन भारत की राजधानी दिल्ली में अ० भा० सन्तमत सत्संग के ६२वें वार्षिक महाधिवेशन के अवसर पर दिनांक ३. ३. १९७० ई० को प्रातः काल में हुआ था। जिसमें उन्होंने उपरोक्त बातें कहा था। महर्षि मेँहीँ सत्संग सुधा सागर के सभी प्रवचनों में कहाँ क्या है? किस प्रवचन में किस प्रश्न का उत्तर है? इसे संक्षिप्त रूप में जानने के लिए 👉यहाँ दवाएँ।
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| महर्षि मेँहीँ सत्संग-सुधा सागर |
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S315 7. सन्तों के विचार में स्वप्न क्या है? what does dream world mean,
Reviewed by सत्संग ध्यान
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12:09:00 pm
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