प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के हिंदी प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S096, इसमें बताया गया है कि संतवाणी का अर्थ कैसे किया जाना चाहिए । उसके लिए क्या योग्यता है ? क्या हर कोई संत वाणी का अर्थ कर सकता है ? संतवाणी बहुत ही गंभीर एवं साधना परक वानियां होती हैं। जिसके बारे में गुरु महाराज कहते हैं--
S096, संत वाणी का अर्थ कौन कर सकता है?-महर्षि मेंही
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प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज