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S455, गुरु का महत्व -सद्गुरु महर्षि मेंही

     प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के हिंदी प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S455, इसमें  बताया गया है कि 'जीवन में गुरु की आवश्यकता क्यों होती है? हम गुरु क्यों बनाते हैं? ज्ञान कौन-सा श्रेष्ठ है और उसके गुरु कैसे होने चाहिए? गुरु और शिष्य का संबंध, गुरु  का अर्थ, गुरु का महत्व, गुरु की महिमा, आदि बातों के बारे में।'

जीवन में गुरु की आवश्यकता
जीवन में गुरु की आवश्यकता

     प्रभु प्रेमियों ! जीवन में हम किसी से कुछ सीखते हैंं । तो वह हमारा गुरु हो जाता है। इस तरह से हमारेेेे बहुत गुरु होते हैं। अवधूत दत्तात्रेय महाराज जी कहते हैं 24 गुरुओं की बात। लेकिन कबीर साहब कहतेे हैं- 'सात गुरु संसार में, चेला सब संसार।' और बातें गुरु महाराज से सुने- 




गुरुदेव का प्रवचन
गुरुदेव का प्रवचन
गुरु महिमा के बारे में सहजो बाई कहतीं हैं-

गुरु महिमा
गुरु महिमा

     प्रभु प्रेमियों !  हमें उम्मीद है कि आप लोगों को गुरु के संबंध में पर्याप्त जानकारी मिल गई होगी। जिन लोगों को उपर्युक्त चित्रों से गुरु महाराज का प्रवचन पढ़ने में दिक्कत हो, उनसे निवेदन है कि वह निम्नोक्त वीडियो देखें-



     
S455, गुरु का महत्व -सद्गुरु महर्षि मेंही  S455, गुरु का महत्व  -सद्गुरु महर्षि मेंही Reviewed by सत्संग ध्यान on 1:57:00 pm Rating: 5

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प्रभु प्रेमियों ! कृपया वही टिप्पणी करें जो आप किसी संतवाणी से प्रूफ कर सके या समझ बनी हो किसी ऐसी बानी का उपयोग न करें जिनसे आपका भी समय खराब हो और हमारा भी जय गुरु महाराज

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